Cricket Me Pich Ko Sukhane Ke Liye New Takniko Ka Anubhav | क्रिकेट में पिच को सुखाने के लिए नई तकनीकों का प्रभाव: 2023?

Cricket Me Pich Ko Sukhane Ke Liye New Takniko Ka Anubhav | क्रिकेट में पिच को सुखाने के लिए नई तकनीकों का प्रभाव?

Cricket Me Pich Ko Sukhane Ke Liye New Takniko Ka Anubhav: नई तकनीकों के प्रकार हीटिंग सिस्टम: ये सिस्टम पिच के अंदर से गर्मी पैदा करके उसे सुखाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ये सिस्टम आमतौर पर बिजली या गैस से संचालित होते हैं। वेंटिलेशन सिस्टम: ये सिस्टम पिच से नमी को हटाने के लिए हवा को पिच के माध्यम से प्रसारित करते हैं। ये सिस्टम आमतौर पर पंखे या ब्लोअर का उपयोग करके संचालित होते हैं। अब्जॉर्बेंट सिस्टम: ये सिस्टम पिच से नमी को अवशोषित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ये सिस्टम आमतौर पर सूखी रेत, पाउडर या अन्य सामग्री का उपयोग करते हैं।

श्रीलंकाई ग्राउंड्समैन द्वारा इस्तेमाल की गई तकनीकों के बारे में जानकारी?

क्रिकेट मैचों में पिच को सुखाने के लिए नई तकनीकों का प्रभाव: आजकल क्रिकेट मैचों में बारिश एक आम समस्या है। बारिश के कारण मैच रद्द या स्थगित होने का खतरा बढ़ जाता है। इस समस्या को दूर करने के लिए क्रिकेट के मैदानों में नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

Cricket Me Pich Ko Sukhane Ke Liye New Takniko Ka Anubhav | क्रिकेट में पिच को सुखाने के लिए नई तकनीकों का प्रभाव?

इन नई तकनीकों में हलोजन लाइट, वाष्पीकरण तकनीक और स्पंज और बाल्टी तकनीक शामिल हैं। हलोजन लाइट पिच को गर्म करके पानी को वाष्पित कर देती हैं। वाष्पीकरण तकनीक में पिच पर एक पतली परत पानी डाली जाती है, और फिर उसे रोलर से रोल किया जाता है। इससे पानी पिच के अंदर की ओर फैल जाता है और वाष्पित हो जाता है। स्पंज और बाल्टी तकनीक में बारिश के तुरंत बाद पिच से अतिरिक्त पानी को हटा दिया जाता है।

इन नई तकनीकों का क्रिकेट मैचों में काफी प्रभाव पड़ा है। इन तकनीकों के इस्तेमाल से मैचों को रद्द या स्थगित होने से बचाया जा सकता है। इससे क्रिकेट के प्रशंसकों को भी खुशी होती है, क्योंकि वे अपना पसंदीदा खेल पूरा देख पाते हैं। 

आइये अब श्रीलंका ने एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया उसके बारे में जानते है विस्तार से?

दोस्तों श्रीलंका में क्रिकेट पिचों को सुखाने के लिए एक नई तकनीक का उपयोग किया गया था, जिसे “सब-एयर सबसर्फेस एरेशन और वैक्यूम पावर्ड ड्रेनेज सिस्टम” कहा जाता है। यह प्रणाली पिच के नीचे से हवा को भेजकर और नमी को वैक्यूम करके पिच को सुखाने के लिए डिज़ाइन की गई है। इसलिए यहां तकनीक बहुत चर्चा में है।

यह प्रणाली श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (SLC) द्वारा विकसित की गई थी, और इसे पहली बार 2023 आईपीएल सीजन में कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में उपयोग किया गया था। इस प्रणाली का उपयोग करके, पिच को केवल 30 मिनट में सूखाया जा सकता है, जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में बहुत तेज है।

इस प्रणाली का उपयोग करने से श्रीलंका में क्रिकेट मैचों को रद्द होने की संभावना कम हो गई है। 2023 आईपीएल सीजन में, श्रीलंका में केवल एक ही मैच बारिश के कारण रद्द हुआ, जबकि पिछले सीजन में 10 मैच रद्द हुए थे। इस प्रणाली का उपयोग अन्य देशों में भी किया जा रहा है। भारत में, यह प्रणाली चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम और बेंगलुरु के चैंपियन्स ट्रॉफी स्टेडियम में उपयोग की जाती है।

श्रीलंकाई ग्राउंड्समैन ने पिच को सुखाने के लिए निम्नलिखित तकनीकों का इस्तेमाल किया:

  • हलोजन लाइट: हलोजन लाइट सूर्य की रोशनी के समान ही गर्मी पैदा करती हैं। ग्राउंड्समैन ने पिच पर हलोजन लाइट लगाईं और उन्हें 24 घंटे तक चालू रखा। इससे पिच में मौजूद पानी वाष्पित हो गया।
  • वाष्पीकरण: ग्राउंड्समैन ने पिच पर एक पतली परत पानी भी डाला। फिर, उन्होंने पिच को रोलर से रोल किया। इससे पानी पिच के अंदर की ओर फैल गया और वाष्पित हो गया।
  • स्पंज और बाल्टी: बारिश के तुरंत बाद, ग्राउंड्समैन ने पिच से अतिरिक्त पानी को हटाने के लिए स्पंज और बाल्टी का इस्तेमाल किया।

इन तकनीकों के इस्तेमाल से श्रीलंकाई ग्राउंड्समैन ने पिच को इतना सुखा दिया कि भारत बनाम पाकिस्तान मैच को रिजर्व डे पर खेला जा सका।

यहां कुछ अन्य तकनीकों का उल्लेख किया गया है जिनका उपयोग पिच को सुखाने के लिए किया जा सकता है:

  • हवादार मशीनें: हवादार मशीनें पिच से पानी को हटाने में मदद करती हैं।
  • वॉटर सॉपर: वॉटर सॉपर एक प्रकार का उपकरण है जो पिच से पानी को चूस लेता है।
  • हाइड्रोलिक ड्रेनेज सिस्टम: हाइड्रोलिक ड्रेनेज सिस्टम पिच के अंदर पानी को निकालने में मदद करते हैं।

इन तकनीकों का चुनाव पिच की स्थिति और मौसम की स्थिति के आधार पर किया जाता है। भारत बनाम पाकिस्तान मैच को रिजर्व डे पर खेला जाना था। हालांकि, बारिश के कारण मैच पहले दिन पूरा नहीं हो पाया। श्रीलंकाई ग्राउंड्समैन ने भारी मेहनत करके पिच को इतना सुखा दिया कि मैच को रिजर्व डे पर खेला जा सका।

निष्कर्ष:

  • नई तकनीकों का उपयोग करके, पिच को पुरानी तकनीकों की तुलना में अधिक तेज़ी से और प्रभावी ढंग से सुखाया जा सकता है।
  • नई तकनीकों का उपयोग करके, पिच को अधिक समान परिस्थितियों में खेला जा सकता है।
  • नई तकनीकों का उपयोग करके, पिचों को सुखाने की लागत को कम किया जा सकता है।

लाभ:

  • मैचों को रद्द होने की संभावना कम हो जाती है।
  • खेल की गुणवत्ता में सुधार होता है।
  • क्रिकेट प्रशासनों के लिए आर्थिक बचत होती है।

नुकसान:

  • कुछ नई तकनीकों का पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • कुछ नई तकनीकों से सुरक्षा चिंताएं हो सकती हैं।

सुझाव:

  • नई तकनीकों का अधिक व्यापक रूप से उपयोग किया जाना चाहिए।
  • नई तकनीकों के संभावित नुकसानों के बारे में जागरूकता बढ़ाना चाहिए।

भविष्य में संभावनाएं:

  • नई तकनीकों में और अधिक सुधार किया जा सकता है।
  • नई तकनीकों को और अधिक किफायती बनाया जा सकता है।
  • नई तकनीकों का उपयोग करके, पिचों को अधिक अनुकूलनीय बनाया जा सकता है, जिससे विभिन्न प्रकार के खेल परिस्थितियों में बेहतर खेल की अनुमति मिलती है।

FAQs about new technologies for drying cricket pitches in Hindi

क्रिकेट में पिच को सुखाने के लिए नई तकनीकों के विभिन्न प्रकार क्या हैं?

क्रिकेट में पिच को सुखाने के लिए कई अलग-अलग नई तकनीकें हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • हीटिंग सिस्टम: ये सिस्टम पिच को सुखाने के लिए गर्मी का उपयोग करते हैं, आमतौर पर नीचे से।
  • वेंटिलेशन सिस्टम: ये सिस्टम पिच से नमी को हटाने के लिए हवा को प्रसारित करते हैं।
  • अब्जॉर्बेंट सिस्टम: ये सिस्टम पिच से नमी को अवशोषित करने के लिए रेत या पाउडर जैसी सामग्री का उपयोग करते हैं।

नई तकनीकों का उपयोग करके क्रिकेट पिचों को सुखाने के क्या लाभ हैं?

नई तकनीकों का उपयोग करके क्रिकेट पिचों को सुखाने के कई लाभ हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • तेज सुखाने का समय: नई तकनीकें पारंपरिक तरीकों, जैसे कवर का उपयोग करना या पिच को रोल करना, की तुलना में पिचों को बहुत तेजी से सुखा सकती हैं।
  • बेहतर पिच गुणवत्ता: नई तकनीकें अधिक सुसंगत और समान पिचों का उत्पादन करने में मदद कर सकती हैं, जिससे बेहतर गुणवत्ता वाला क्रिकेट हो सकता है।
  • मैच रद्द होने का जोखिम कम: नई तकनीकें बारिश के कारण मैचों के रद्द होने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।

नई तकनीकों का उपयोग करके क्रिकेट पिचों को सुखाने के क्या नुकसान हैं?

नई तकनीकों का उपयोग करके क्रिकेट पिचों को सुखाने के कुछ संभावित नुकसान हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • लागत: नई तकनीकें स्थापित करने और बनाए रखने के लिए महंगी हो सकती हैं।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: कुछ नई तकनीकें, जैसे हीटिंग सिस्टम, का पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • सुरक्षा संबंधी चिंताएं: कुछ नई तकनीकें, जैसे वेंटिलेशन सिस्टम, सुरक्षा खतरे पैदा कर सकते हैं।

क्या भारत में क्रिकेट पिचों को सुखाने के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है?

हां, भारत में क्रिकेट पिचों को सुखाने के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, खासकर प्रमुख अंतरराष्ट्रीय स्थलों पर। उदाहरण के लिए, चेन्नई में एमए चिदंबरम स्टेडियम और बेंगलुरु में चिन्नास्वामी स्टेडियम दोनों अपनी पिचों को सुखाने के लिए उप-वायु उपसतह वातन और वैक्यूम संचालित जल निकासी प्रणालियों का उपयोग करते हैं।

क्रिकेट पिचों को सुखाने के लिए नई तकनीकों का भविष्य क्या है?

क्रिकेट पिचों को सुखाने के लिए नई तकनीकों का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ती जाएगी, हम पिचों को सुखाने के और भी अधिक अभिनव और प्रभावी तरीके देखने की उम्मीद कर सकते हैं। इससे क्रिकेट की गुणवत्ता में सुधार करने और मैचों के रद्द होने के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।

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